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संघर्ष से सफलता तक: सारंगी की अर्चिता बहुगुणा को उत्कृष्ट प्रदर्शन पर मिली स्कूटी, नाना-नानी का सपना हुआ साकार




#झाबुआ टाइम्स 

सारंगी :-  कठिन परिस्थितियों और आर्थिक अभावों के बीच भी यदि परिवार का साथ, दृढ़ संकल्प और मेहनत हो तो सफलता अवश्य मिलती है। सारंगी की प्रतिभाशाली छात्रा अर्चिता बहुगुणा ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिखाया है। कक्षा 12वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली अर्चिता को राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजना के तहत स्कूटी प्रदान की गई है। उसकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

अर्चिता का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा। जब वह मात्र एक वर्ष की थी, तभी उसकी माता का निधन हो गया। इसके बाद उसके नाना गिरधारी लाल चौहान और नानी कमला बाई चौहान उसे अपने साथ सारंगी ले आए और अपनी पुत्री की तरह उसका पालन-पोषण किया। मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले इस दंपति ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी संतानों के साथ-साथ अर्चिता की शिक्षा और भविष्य को संवारने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

आर्थिक तंगी और जीवन की कठिन चुनौतियों के बावजूद गिरधारी लाल चौहान एवं कमला बाई चौहान ने अर्चिता को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने के लिए निरंतर प्रयास किए। उन्होंने हमेशा उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। नाना-नानी के त्याग, संघर्ष और अर्चिता की मेहनत का परिणाम यह रहा कि उसने कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट अंक अर्जित कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

अर्चिता की इस उल्लेखनीय सफलता पर राज्य सरकार द्वारा उसे स्कूटी प्रदान की गई, जिससे उसकी आगे की पढ़ाई और आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा। स्कूटी प्राप्त करने के बाद अर्चिता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने नाना-नानी को देते हुए कहा कि उनके प्रेम, विश्वास, त्याग और मार्गदर्शन के बिना वह यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाती।

अर्चिता बहुगुणा की सफलता केवल एक छात्रा की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उसके नाना-नानी के वर्षों के संघर्ष, समर्पण और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की जीत भी है। अर्चिता अब उच्च शिक्षा प्राप्त कर जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती है और समाज के लिए प्रेरणा बनना चाहती है।

विशेष:

"मजदूरी कर परिवार संभालने वाले गिरधारी लाल चौहान और कमला बाई चौहान ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा, संस्कार और दृढ़ इच्छाशक्ति ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उनकी नातिन अर्चिता की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।"

रिपोर्ट: झाबुआ टाइम्स न्यूज़

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